ED Full Form in Hindi ; इ.डी के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ?

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इ डी का फुल फॉर्म क्या है ?

ED Full Form in Hindi :- Directorate of Enforcement (ED)

ED का फुल फॉर्म  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) है।प्रवर्तन निदेशालय  को अंग्रेजी में  Directorate of Enforcement (ED)  कहते है | यह एक कानून प्रवर्तन  और आर्थिक खुफिया एजेंसी है| प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भारत में आर्थिक कानूनों को लागू करने और आर्थिक अपराध से लड़ने का काम करती है। ईडी राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आता है।

इस लेख के माधयम से हम इ.डी। के बारे में  सभ कुछ जाएंगे जैसे ई डी ka Full Form kya hai , ED meaning in Hindi , ED काम कैसे करती है ? , फेमा और पीएमएलए क्या हैं? , ई डी के पास कौन कौन सी शक्तिया होती है ,आइए प्रश्नो के बारे संक्षेप में जानकारी प्राप्त करते है |

ED Full Form in Hindi

E.D की उत्पत्ति

इस निदेशालय की उत्पत्ति 1 मई 1956 को हुई थी | जब  विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 के तहत विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से निपटने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग में एक ‘प्रवर्तन इकाई’ का गठन किया गया था। वर्ष 1957 में, इस इकाई का नाम बदल  कर ‘प्रवर्तन निदेशालय’ रख दिया था |

प्रवर्तन निदेशालय का इतिहास

प्रवर्तन निदेशालय की स्थापना 1 मई 1956 को आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा एक प्रवर्तन इकाई के रूप में की गई थी। यूनिट ने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA), 1947 को लागू किया था । इसकी शुरुआत नई दिल्ली मुख्यालय के अलावा बॉम्बे और कलकत्ता में केवल दो क्षेत्रीय कार्यालयों से हुई थी। इनका नेतृत्व निदेशक  कानूनी सेवा अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक के एक उप अधिकारी और विशेष पुलिस स्थापना के 3 निरीक्षक थे ।

यूनिट का नाम बदलकर 1957 में प्रवर्तन निदेशालय कर दिया गया था | एक और शाखा मद्रास में स्थापित की गई। ED द्वारा लागू किए गए वित्तीय कानून में संशोधन कर  FERA 1973 बन गया।

1990 के दशक के अंत में, आर्थिक उदारीकरण और भारत में विदेशी मुद्रा की शुरुआत के कुछ वर्षों बाद, व्यापार में विदेशी मुद्रा को नियंत्रित करने की आवश्यकता महसूस की गई |  जिसके लिए फेरा के प्रावधान कम थे। इसलिए, FERA 1973 को निरस्त कर दिया गया था| एक नया कानून विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम दिसंबर 1999 में अधिनियमित किया गया था। FERA को 1 जून 2000 से FEMA द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था

प्रवर्तन निदेशालय की संरचना

प्रवर्तन निदेशालय अपने कुछ अधिकारियों को सीधे भर्ती करता है | जबकि कुछ अन्य जैसे आयकर, उत्पाद शुल्क, विभाग, आदि को अन्य राज्य एजेंसियों के रूप में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किया जाता है । प्रवर्तन निदेशालय में सम्लित अधिकारी , भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS), भारतीय कॉर्पोरेट कानून सेवा (ICLS), आदि  हैं।

ईडी द्वारा कौन से अधिनियम लागू किए जाते हैं?

1.विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 (Foreign Exchange Management Act)

यह अधिनियम 1999 में लागु किया गया था | इस अधिनियम का उद्देश्य  भारत में विदेशी मुद्रा, व्यापार, विकास और रखरखाव को विनियमित करने था |  यह अधिनियम विदेशी मुद्रा अपराधों को नागरिक अपराध घोषित करता है। Foreign Exchange Management Act, 1999 अर्ध-न्यायिक शक्तियों वाला नागरिक कानून है। प्रवर्तन निदेशालय इस कानून को वर्ष 2000 से लागू कर रहा है।

 2.धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (Prevention of Money Laundering Act)

यह अधिनियम 2002 में लागु किया गया था | लेकिन 1 जुलाई 2005 से लागू हुआ, जब इसे इसके कार्यान्वयन के लिए ईडी को सौंप दिया गया था। यह मनी लॉन्ड्रिंग के नियंत्रण से संबंधित है| आरोपी व्यक्ति के धनशोधन से अर्जित संपत्ति को जब्त करना, और अन्य विनियमों और दंडों से संबंधित है। यह आपराधिक कानून है।

प्रवर्तन निदेशालय मुख्य रूप से इन दो कृत्यों के लिए एक खुफिया और प्रवर्तन एजेंसी के रूप में कार्य करता है। यह मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इंडिया (FIU- IND) के साथ समन्वय में काम करता है।

3. भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (Fugitive Economic Offenders Act)

यह अधिनियम धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था। FEOA 2018 किसी भी विशेष अदालत को 100 करोड़ रुपये से अधिक के आरोपित अपराधियों की संपत्तियों को जब्त करने और जब्त करने की शक्ति प्रदान करता है।

प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियां

अधिकारियों की शक्तियां 

  • ईडी के अधिकारियों के पास मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच करना |
  • संपत्ति की कुर्की की कार्यवाही शुरू करना
  • आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलने  की प्रमुख शक्तियां है ।

जांच अधिकारियों की शक्तियां 

  • धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत, ईडी के जांच अधिकारियों के पास निम्नलिखित शक्तियां हैं:
  • वे किसी भी संपत्ति या संपत्ति के मूल्य को, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, एक आपराधिक गतिविधि के रूप में जप्त  कर सकते हैं।
  • संपत्ति से संबंधित स्थान और अभिलेखों की खोज और सर्वेक्षण कर सकते हैं।
  • वे आरोपी को गिरफ्तार तथा ,आरोपी से संबंधित लोगों को बुला कर  बयान दर्ज कर सकते हैं।

प्राधिकरण की शक्तियां: 

  • ईडी के अधिकारी जब्त की गई संपत्ति या रिकॉर्ड पर पहचान चिह्न लगा सकते हैं |
  • वे एक उपयुक्त सूची बना सकते हैं और/या अभियुक्तों और गवाहों के बयान दर्ज कर सकते हैं।

तलाशी के दौरान अधिकारियों की शक्तियां:

  • ईजी के अधिकारियों के पास आरोपी के खिलाफ निनलिखित शक्तियां होती है |
  • संपत्ति तक पहुंचने शक्तियां होती है ।
  • संपत्ति की तलाशी लेने को शक्तियां होती है ।
  • जब्त करने या फ्रीज करने की शक्तियां होती है ।
  • संबंधित लोगों की जांच करने आदि की शक्तियां होती है ।

सम्मन के दौरान अधिकारियों की शक्तियां:

  • प्रवर्तन निदेशालय के क्षेत्रीय, जोनल या सबज़ोनल निदेशकों के पास वित्तीय अपराध से संबंधित किसी भी व्यक्ति को बुलाने की शक्ति होती है | जो व्यक्तिगत रूप से या एजेंटों के माध्यम से बैठक में भाग लेने के लिए बाध्य है।
  • ये न्यायिक कार्यवाही मानी जाती हैं | और भारतीय दंड संहिता की धारा 45 के अंतर्गत आती हैं।

फेमा और पीएमएलए के तहत ईडी की शक्तियां क्या हैं?

प्रवर्तन निदेशालय के कार्य (How Enforcement Directorate Works)

प्रवर्तन निदेशालय के प्राथमिक कार्य वित्तीय अधिनियम फेमा 1999 और पीएमएलए 2002 को लागू करना है। इन अधिनियमों के तहत ईडी के अन्य कार्य नीचे बताए गए हैं।

  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999  के संदिग्ध कानून उल्लंघन की जांच करना । 
  • ये अपराध ईडी द्वारा गिरफ्तारी के लिए उत्तरदायी हैं | जो मामले में शामिल धन की लागत का तीन गुना हो सकता है।
  • धन शोधन से संबंधित संदिग्ध विषयों पर जांच का संचालन और प्रबंधन करना  ।
  • प्रवर्तन निदेशालय धनशोधन से संबंधित या खरीदी गई संपत्ति को जब्त या जब्त कर सकता है|
  •  संपत्ति की कुर्की, फ्रीजिंग जैसी कार्रवाई कर सकता है।
  • ईडी अधिकारी संदिग्ध या आरोपी को गिरफ्तार या मुकदमा चला सकते हैं।
  • मनी लॉन्ड्रिंग या धोखाधड़ी के मामलों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय कारण बताओ नोटिस का निर्णय भी कर सकता है | दंड लगा सकता है और विशेष न्यायालयों में मुकदमा चला सकता है।
  •  फ्यूजिटिव आर्थिक अपराधियों अधिनियम  2018 के तहत  प्रवर्तन निदेशालय, भारत की सरकारों के साथ-साथ विदेशी देशों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए, का पता लगाने अपराधी मुकदमा चलाने की शक्तियां प्रदान की गई है।
  • (COFEPOSA), 1974 के तहत प्रवर्तन निदेशालय इस अधिनियम के तहत उन मामलों की जांच में सहायता करता है | 
  • पीएमएलए और एफईओए के प्रावधानों के तहत ईडी अन्य देशों के साथ सहयोग करता है |
  • उदाहरण के लिए, यह मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम और विनियमन के लिए उनके साथ समझौते कर सकता है।
  • ईडी मामले से जुड़ी संपत्तियों की प्रतिपूर्ति के लिए भी काम कर सकती है।

सितंबर 2019 तक, ईडी पीएमएलए 2002 के तहत 963 मामलों और फेमा 1999 के तहत 7393 मामलों पर काम कर रहा था। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांचे गए कुछ हाई प्रोफाइल मामले हैं:

  • ऑगस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाला  – राजनेताओं के लिए वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए बिचौलियों द्वारा भ्रष्टाचार
  • आईएनएक्स मीडिया  – विदेशी मुद्रा संवर्धन बोर्ड में निकासी की अनियमितता और तत्कालीन वित्त मंत्री के बेटे की कंपनी को भुगतान का निर्देश।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आईएल एंड एफएस)  – अलग कर्ज, तरलता संकट, डिफॉल्ट ब्याज भुगतान आदि के संबंध में।
  • आईसीआईसीआई बैंक घोटाला –  वीडियोकॉन समूह को अनियमित ऋण भुगतान के दौरान भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत लाभ का संदेह।
  • किंगफिशर एयरलाइंस का  कर्ज- कथित तौर पर 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज का मामला, कंपनी का मालिक भगोड़ा अपराधी है।
  • पंजाब नेशनल बैंक घोटाला  – हजारों करोड़ रुपये के कर्ज, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी भगोड़े अपराधी हैं।

Main objectives of ED (E.D का मुख्या उद्देश्य )

  • ED का प्राथमिक उद्देश्य भारत सरकार के दो प्रमुख कानूनों को लागू करना है।
  • जिनमें FEMA 1999 (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) और PMLA 2002 (मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट) शामिल हैं|
  • ईडी की आधिकारिक वेबसाइट कई अन्य लक्ष्यों को बताती  है |
  • जो विशेष रूप से भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलो से लड़ने  से सम्बंधित हैं।
  • E.D  एक खुफिया एजेंसी है , जो  सम्पूर्ण जानकारी जनता के सामने रखना GIO के कानून का उलंघन करना है |

FAQ (E.D के बारे में पूछे गए सवाल )

प्रश्न :-  E.d क्या काम करती है ?

उत्तर :- आर्थिक खुफिया संगठन है जो अर्थशास्त्र के कानूनों को लागू और  देश  को वित्तीय अपराधों से बचाव करताहै। |

प्रश्न :- E.D कब बना था ?

उत्तर :- ईडी की स्थापना 1956 में हुई थी।

प्रश्न :- ईडी का मुख्यालय कहा है?

उत्तर :- मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

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